बरबीघा

मोदी मैजिक, जानिए क्या है!! पति बना राजमिस्त्री, पत्नी के लिए बनाया शौचालय

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मोदी मैजिक, जानिए क्या है!! पति बना राजमिस्त्री, पत्नी के लिए बनाया शौचालय

“मोदी जी कहलथिन त बीबी के लिए शौचालय बनाबे ले राजमिस्त्री बन गेलियो”

मोदी जी के आह्वान पर वीबी पार्वती के लिए शौचालय बनाने हेतु अनिल मांझी बन गया राजमिस्त्री

पति-पत्नी ने मिलकर बनाया शौचालय

अनिल मांझी ने कहा इज्जत घर बहुत जरूर

शेखपुरा न्यूज़ ब्यूरो

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान का असर गरीब गुरबा लोगों पर भी देखने को मिलता है। ऐसा ही असर शेखपुरा जिला के बरबीघा नगर परिषद के वार्ड संख्या 5 में अनिल मांझी और उनकी पत्नी पार्वती देवी पर देखने को मिला।खुले में शौच मुक्ति के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर अनिल मांझी ने स्वयं कुदाल और औजार उठाकर राजमिस्त्री बन गया और एक सुंदर इज्जत घर बना डाली। अनिल मांझी ने एक सप्ताह के अथक मेहनत पर पति-पत्नी ने मिलकर शौचालय का निर्माण कर दिया।

राजमिस्त्री का फीस था मँहगा तो बन गया राजमिस्त्री

राजमिस्त्री बनकर पत्नी के लिए शौचालय का निर्माण करने वाले अनिल मांझी ने बताया कि नरेंद्र मोदी जी के आह्वान पर शौचालय निर्माण की राशि जब नगर परिषद से जब सात हजार आए तो राजमिस्त्री से संपर्क करने पर मोटी फीस की मांग की गई जो कि वह देने से असमर्थ थे और इसी वजह से हुए सारा सामान जुटाकर स्वयं पत्नी के साथ मिलकर राजमिस्त्री बन गए। अनिल मांझी ने बताया कि पहले वह कभी राजमिस्त्री का काम नहीं किया इसकी वजह से शुरुआत में काफी परेशानी हुई परंतु अपने मित्र राजमिस्त्री से संपर्क कर जानकारी लेकर, समय-समय पर पूछताछ कर वह शौचालय का निर्माण में जुट गए और उसे पूरा कर दिया।

इज्जत घर जरूरी

पार्वती देवी और अनिल मांझी कहते हैं कि गरीब के लिए शौचालय (इज्जत घर) बहुत ही जरूरी है और इसके लिए सभी को जागरुक होने की जरूरत है। इज्जत घर हर हाल में सभी लोगों को बना लेना चाहिए और इससे अपनी इज्जत और प्रतिष्ठा तो बढ़ेगी ही साथ ही साथ गंदगी और बीमारियों से भी छुटकारा मिलेगा।

घर तक पहुंचा नल का जल

अनिल मांझी के घर तक मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना के तहत हर घर नल का जल पहुंच चुका है। इससे पूर्व पानी के लिए दूर जाना पड़ता था परंतु अनिल मांझी के घर तक अब नल का जल भी पहुंच चुका है।

समाज के लोगों को जागरुक होने की जरूरत, अनिल मांझी से लें प्रेरणा

इसको लेकर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी दिनेश कुमार कहते हैं कि समाज के लोगों को अनिल मांझी और उसकी पत्नी पार्वती देवी से प्रेरणा लेने की जरूरत है। सभी को शौचालय निर्माण के लिए तत्पर होना चाहिए और अपने लिए, अपने परिवार की इज्जत के लिए शौचालय बनाना चाहिए ना कि सरकारी दबाव में आकर। दिनेश कुमार ने बताया कि पहली किस्त के रूप में साढ़े सात हजार रुपया तथा दूसरी किस्त के रूप में साढ़े चार हजार रुपए दिया जाता है।

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